नगर विकास विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार को पिछड़ा वर्ग जनगणना के ताज़ा आंकड़े सार्वजनिक कर दिए। जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग की कुल आबादी 4,35,961 है। इनमें बीसी-1 की संख्या 2,84,534 और बीसी-2 की आबादी 1,51,427 दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के जारी होने के बाद अब नगर निकाय चुनाव और वार्डों के आरक्षण प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जारी अधिसूचना को जल्द ही राज्य चुनाव आयोग को भेजा जाएगा, जिसके बाद आयोग परिसीमन के अनुसार वार्डों के आरक्षण निर्धारण का कार्य शुरू करेगा। इस बार नगर निकाय चुनाव 2017 के परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे। यानी निकाय क्षेत्रों में वार्डों का पुनर्गठन नहीं होगा।
राज्य कैबिनेट पहले ही नगर निकायों में ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट को स्वीकृति दे चुका है। अब जारी आंकड़े ओबीसी आरक्षण तय करने का आधार बनेंगे। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में मेयर एवं अध्यक्ष पदों के आरक्षण सहित सभी वार्डों का आरक्षण संबंधित क्षेत्र की आबादी के अनुपात में तय किया जाएगा। ओबीसी के लिए ट्रिपल टेस्ट मानकों के तहत डेटा संग्रह की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यह डेटा राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए जुटाया गया था। ओबीसी-1 और ओबीसी-2 की आबादी पर आधारित रिपोर्ट पहले ही समिति द्वारा नगर विकास विभाग को सौंप दी गई थी।
राज्य के सभी 48 नगर निकायों में अब पहली बार ओबीसी-1 और ओबीसी-2 के लिए आरक्षित सीटें तय की जाएंगी। पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा के अनुसार नगर निकायों में अधिकतम आरक्षण सीमा 50% रहेगी, जिसमें एसटी, एससी और ओबीसी वर्गों के लिए सीटें सुनिश्चित की जाएंगी। कुल वार्डों की संख्या निर्धारित करने के बाद इन्हीं वर्गों के लिए आरक्षण का बंटवारा किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से नगर निकाय चुनाव नहीं हो सके हैं, जिसके कारण निकायों का कामकाज फिलहाल अधिकारी संभाल रहे हैं। नए आंकड़े जारी होने के बाद अब चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की राह प्रशस्त हो गई है।